गिर सोमनाथ : गुजरात के गिर सोमनाथ में हुऐ डेमोलिशन पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल : गुजरात सरकार ने दिया जवाब

हाल ही में गुजरात के गिर सोमनाथ मंदिर के पास प्रशासन ने बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की। इस दौरान प्रशासन ने मंदिर के पास स्थित दरगाह और कई धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद गिर सोमनाथ मैं माहौल काफी गरम रहा। लेकिन एक मुस्लिम कमेटी ने इसकी याचिका गुजरात हाइकोर्ट मैं दाखिल की।इसका फैसल २३ तारीख़ को आना था लेकिन इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब मांगा था।

प्रशासन ने इस अतिक्रमण अभियान के लिए 58 बुलडोजर तैनात किए थे। इलाके में इतने बड़े पैमाने पर बुलडोजर की कार्रवाई क्यों की गई? इस बारे में गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। आइए जानते हैं गुजरात सरकार ने क्या कहा है।

बुलडोजर क्यों चलाया गया?

सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में गुजरात सरकार ने कहा है कि अतिक्रमण के खिलाफ की गई बुलडोजर कार्रवाई में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मंदिर से जो जमीन हटाई गई है, वह अरब सागर के तट से सटी सरकारी जमीन है। गुजरात सरकार ने कहा कि गिर सोमनाथ मंदिर के पास अतिक्रमण के खिलाफ चलाया गया अभियान राजस्व अधिकारियों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। गुजरात सरकार का मानना है कि उसने अरब सागर के तट पर स्थित सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए यह अभियान चलाया है।

आपको बता दें कि इस मामले में एक मुस्लिम संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में गुजरात सरकार के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी, जिन्होंने दरगाहों समेत कई धार्मिक ढांचों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की थी। इस मामले पर अपना हलफनामा दाखिल करते हुए गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अरब सागर के तट पर स्थित सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया। सरकार ने कहा कि यह अतिक्रमण के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।

गुजरात सरकार ने मुस्लिम संगठन की ओर से दायर याचिका की दलील का विरोध किया है. गुजरात सरकार का कहना है कि सरकार ने नियमों और प्रक्रियाओं का पूरा पालन करते हुए जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई की है. गुजरात सरकार ने संगठन पर मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का आरोप लगाया है, जबकि सच्चाई कुछ और है. इस मामले पर जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के पहले चरण में 8 अक्टूबर 2023 को प्रभास पाटन गांव से 26 अतिक्रमण हटाए गए थे. सरकार ने बताया कि अतिक्रमण करने वालों में एक हिंदू समुदाय से भी था.

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